विपश्यना

सयाजी ऊ बा खिन और विपश्यना की परंपरा

सयाजी ऊ बा खिन से जुड़ी परंपरा और भारत में विपश्यना के प्रसार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर स्रोत-आधारित लेख।

सयाजी ऊ बा खिन और विपश्यना की परंपरा Read More »

धम्मगिरि इगतपुरी: साधना परंपरा और शिविरों का महत्व

धम्मगिरि इगतपुरी के संदर्भ में विपश्यना शिविरों और साधना परंपरा की भूमिका पर स्रोत-आधारित परिचय।

धम्मगिरि इगतपुरी: साधना परंपरा और शिविरों का महत्व Read More »

दीर्घ शिविरों के लिए तैयारी और पात्रता

20, 30, 45 और 60 दिवसीय जैसे दीर्घ शिविरों के संदर्भ में स्रोत में दी गई पात्रता और पूर्व अभ्यास की आवश्यकता।

दीर्घ शिविरों के लिए तैयारी और पात्रता Read More »

यथाभूत ज्ञान-दर्शन क्या है? वास्तविकता को जैसी है वैसी देखना

अतिशयोक्ति या अवमूल्यन के बिना अनुभव और गुण-दोषों को यथार्थ रूप में देखने का महत्व।

यथाभूत ज्ञान-दर्शन क्या है? वास्तविकता को जैसी है वैसी देखना Read More »

किशोरों के लिए विपश्यना: कम उम्र में अनुशासन और जागरूकता

किशोर साधकों के लिए आयोजित शिविरों के संदर्भ में जागरूकता, अनुशासन और मानसिक विकास की दिशा।

किशोरों के लिए विपश्यना: कम उम्र में अनुशासन और जागरूकता Read More »

सुख-दुःख के बीच संतुलन: बाहरी परिस्थितियां और मन

बाहरी उपलब्धियों से मिलने वाले सुख की सीमाओं और आंतरिक संतुलन की आवश्यकता पर चिंतन।

सुख-दुःख के बीच संतुलन: बाहरी परिस्थितियां और मन Read More »

लघु और एक-दिवसीय शिविर: पुराने साधकों के लिए अभ्यास का अवसर

पुराने साधकों के लिए एक-दिवसीय और लघु शिविरों के उद्देश्य तथा अभ्यास की निरंतरता पर जानकारी।

लघु और एक-दिवसीय शिविर: पुराने साधकों के लिए अभ्यास का अवसर Read More »

क्रोध आने पर क्या करें? प्रतिक्रिया से निरीक्षण तक

क्रोध की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय अपनी मानसिक और शारीरिक अनुभूतियों को देखने की साधना पर विचार।

क्रोध आने पर क्या करें? प्रतिक्रिया से निरीक्षण तक Read More »

सतिपट्ठान शिविर और गंभीर अभ्यास की तैयारी

सतिपट्ठान जैसे उन्नत अभ्यास के लिए नियमितता, पूर्व अनुभव और गंभीर साधना की आवश्यकता को उपलब्ध स्रोत के अनुसार समझना।

सतिपट्ठान शिविर और गंभीर अभ्यास की तैयारी Read More »

राग, द्वेष और मोह से मुक्ति की दिशा

राग, द्वेष और मोह को मन के अशुद्धि-कारक रूपों में समझते हुए साधना के माध्यम से उनके निरीक्षण की दिशा।

राग, द्वेष और मोह से मुक्ति की दिशा Read More »