सयाजी ऊ बा खिन और विपश्यना की परंपरा
सयाजी ऊ बा खिन से जुड़ी परंपरा और भारत में विपश्यना के प्रसार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर स्रोत-आधारित लेख।
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सयाजी ऊ बा खिन से जुड़ी परंपरा और भारत में विपश्यना के प्रसार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर स्रोत-आधारित लेख।
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धम्म सेवा को पद या प्रतिष्ठा के बजाय कल्याण और योगदान की भावना से समझने का प्रयास।
धम्म सेवा क्या सिखाती है? देने की भावना का महत्व Read More »
विभिन्न केंद्रों में आयोजित शिविरों की जानकारी से भारत में साधना के लिए उपलब्ध केंद्रों की व्यापकता को समझने वाला लेख।
भारत में विपश्यना केंद्रों का विस्तार और साधकों की सुविधा Read More »
धम्म के कार्य में कटुता, गुटबाजी और अहंकार से बचते हुए प्रेम, सहयोग और सद्भाव का वातावरण बनाने की प्रेरणा।
धर्म की मिठास: साधना और सेवा में सद्भाव क्यों जरूरी है Read More »
धम्मगिरि इगतपुरी के संदर्भ में विपश्यना शिविरों और साधना परंपरा की भूमिका पर स्रोत-आधारित परिचय।
धम्मगिरि इगतपुरी: साधना परंपरा और शिविरों का महत्व Read More »
गलती को सही ठहराने के बजाय उसे स्वीकारना, कारण समझना और भविष्य में सुधार करना आध्यात्मिक प्रगति का हिस्सा कैसे बन सकता है।
गलती स्वीकारने की शक्ति और आत्म-सुधार Read More »
स्रोत में दिए गए केंद्र-कार्यक्रमों के आधार पर शिविर के लिए नियमावली पढ़ने, आवेदन और स्वीकृति की सामान्य प्रक्रिया।
विपश्यना केंद्रों में ऑनलाइन पंजीकरण: क्या ध्यान रखें? Read More »
कमियों को छिपाने या उनका औचित्य सिद्ध करने के बजाय उन्हें पहचानकर सुधार की दिशा में बढ़ने का दृष्टिकोण।
अपनी कमजोरियों को स्वीकारना क्यों जरूरी है? Read More »
कृतज्ञता शिविर की भावना, सामूहिक साधना और गुरु-परंपरा के प्रति आभार को उपलब्ध स्रोत के आधार पर समझने वाला लेख।
कृतज्ञता शिविर: गुरु परंपरा के प्रति आभार और साधना Read More »
अपने अच्छे गुणों को पहचानते हुए अहंकार से बचने और उन्हें निरंतर विकसित करने की आवश्यकता।
अपने सद्गुणों पर गर्व नहीं, उनका संवर्धन करें Read More »