बाहरी उपलब्धियों से आगे: स्थायी मानसिक शांति की खोज
व्यवसाय, प्रतिष्ठा और उपलब्धियों के साथ आने वाले सुख की अस्थिरता तथा आंतरिक संतुलन की आवश्यकता पर लेख।
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व्यवसाय, प्रतिष्ठा और उपलब्धियों के साथ आने वाले सुख की अस्थिरता तथा आंतरिक संतुलन की आवश्यकता पर लेख।
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साधना से विकसित होने वाली मैत्री, करुणा और संतुलित व्यवहार की भावना पर चिंतन।
करुणा और मैत्री: मन की शुद्धि से व्यवहार की शुद्धि तक Read More »
धन, शक्ति और प्रतिष्ठा के बावजूद मनुष्य को वास्तविक शांति की आवश्यकता क्यों रहती है—विश्व आर्थिक मंच में दिए गए संबोधन के संदर्भ से प्रेरित लेख।
दुनिया की सफलता और वास्तविक खुशी: दावोस से उठता सवाल Read More »
शील, समाधि और प्रज्ञा को साधना के परस्पर जुड़े आयामों के रूप में समझने का सरल परिचय।
शील, समाधि और प्रज्ञा: साधना की व्यापक दिशा Read More »
गुरु से प्राप्त धम्म-विद्या के प्रति कृतज्ञता और दूसरों के कल्याण के लिए सेवा की भावना पर चिंतन।
गुरु-ऋण और धम्म सेवा: सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाना Read More »
सैद्धांतिक जानकारी उपयोगी है, लेकिन अनुभव और अभ्यास के बिना उसका जीवन में प्रभाव सीमित रह सकता है—इस विचार पर आधारित लेख।
धम्म की चर्चा बनाम धम्म का अनुभव Read More »
धम्म को अपने आचरण, साधना और व्यवहार में उतारने की प्रेरणा पर आधारित स्रोत-आधारित लेख।
धर्म के सजीव उदाहरण बनें: केवल बोलें नहीं, जीएं Read More »
धर्म की चर्चा और वास्तविक जीवन में उसे धारण करने के बीच के अंतर को साधना के संदर्भ में समझना।
धर्म को धारण करना केवल चर्चा से आगे की बात है Read More »
2001 की 14-दिवसीय धर्मयात्रा के संदर्भ में बुद्ध से जुड़े तीर्थस्थलों, सामूहिक साधना और धम्मवाणी की झलक।
धर्मयात्रा 2001: बुद्ध के तीर्थस्थलों की साधना यात्रा Read More »
सामूहिक कार्य में अपनी राय रखने के बाद निर्णय से चिपके रहने के बजाय व्यापक हित को स्वीकारने की सीख।
सुझाव देना और परिणाम स्वीकारना: आसक्ति से कैसे बचें? Read More »