सत्य को स्वीकारने का साहस और साधना
यथार्थ को बिना सजाए या छिपाए देखने की क्षमता साधना में क्यों महत्वपूर्ण है।
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यथार्थ को बिना सजाए या छिपाए देखने की क्षमता साधना में क्यों महत्वपूर्ण है।
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बोधि को केवल ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि अपने भीतर भ्रम और अज्ञान कम करने की सतत प्रेरणा के रूप में समझना।
बोधि दिवस: भीतर की जागरूकता को जगाने की प्रेरणा Read More »
आषाढ़ पूर्णिमा से जुड़े धम्मचक्कपवत्तन के संदर्भ और धम्म के प्रसार की प्रेरणा पर आधारित लेख।
आषाढ़ पूर्णिमा और धम्मचक्कपवत्तन दिवस का संदेश Read More »
राग, द्वेष और मोह जैसे मानसिक विकारों को पहचानकर आंतरिक परिवर्तन की दिशा में बढ़ने पर आधारित लेख।
धर्म का प्रकाश: भीतर के अंधकार को पहचानना Read More »
जीवन की अनियंत्रित परिस्थितियों के बीच द्वेष या निराशा में डूबने के बजाय संतुलित प्रतिक्रिया विकसित करने का चिंतन।
कठिन परिस्थितियों में मन को संतुलित रखने की साधना Read More »
धम्म के संदर्भ में जन्म आधारित ऊंच-नीच की भावना से परे शील, समाधि और प्रज्ञा के महत्व को समझने वाला लेख।
जाति और ऊंच-नीच से परे धम्म का मानवीय संदेश Read More »
व्यवसाय, प्रतिष्ठा और उपलब्धियों के साथ आने वाले सुख की अस्थिरता तथा आंतरिक संतुलन की आवश्यकता पर लेख।
बाहरी उपलब्धियों से आगे: स्थायी मानसिक शांति की खोज Read More »
साधना से विकसित होने वाली मैत्री, करुणा और संतुलित व्यवहार की भावना पर चिंतन।
करुणा और मैत्री: मन की शुद्धि से व्यवहार की शुद्धि तक Read More »
धन, शक्ति और प्रतिष्ठा के बावजूद मनुष्य को वास्तविक शांति की आवश्यकता क्यों रहती है—विश्व आर्थिक मंच में दिए गए संबोधन के संदर्भ से प्रेरित लेख।
दुनिया की सफलता और वास्तविक खुशी: दावोस से उठता सवाल Read More »
शील, समाधि और प्रज्ञा को साधना के परस्पर जुड़े आयामों के रूप में समझने का सरल परिचय।
शील, समाधि और प्रज्ञा: साधना की व्यापक दिशा Read More »