दीर्घ शिविरों के लिए तैयारी और पात्रता
20, 30, 45 और 60 दिवसीय जैसे दीर्घ शिविरों के संदर्भ में स्रोत में दी गई पात्रता और पूर्व अभ्यास की आवश्यकता।
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20, 30, 45 और 60 दिवसीय जैसे दीर्घ शिविरों के संदर्भ में स्रोत में दी गई पात्रता और पूर्व अभ्यास की आवश्यकता।
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अतिशयोक्ति या अवमूल्यन के बिना अनुभव और गुण-दोषों को यथार्थ रूप में देखने का महत्व।
यथाभूत ज्ञान-दर्शन क्या है? वास्तविकता को जैसी है वैसी देखना Read More »
किशोर साधकों के लिए आयोजित शिविरों के संदर्भ में जागरूकता, अनुशासन और मानसिक विकास की दिशा।
किशोरों के लिए विपश्यना: कम उम्र में अनुशासन और जागरूकता Read More »
बाहरी उपलब्धियों से मिलने वाले सुख की सीमाओं और आंतरिक संतुलन की आवश्यकता पर चिंतन।
सुख-दुःख के बीच संतुलन: बाहरी परिस्थितियां और मन Read More »
पुराने साधकों के लिए एक-दिवसीय और लघु शिविरों के उद्देश्य तथा अभ्यास की निरंतरता पर जानकारी।
लघु और एक-दिवसीय शिविर: पुराने साधकों के लिए अभ्यास का अवसर Read More »
क्रोध की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय अपनी मानसिक और शारीरिक अनुभूतियों को देखने की साधना पर विचार।
क्रोध आने पर क्या करें? प्रतिक्रिया से निरीक्षण तक Read More »
सतिपट्ठान जैसे उन्नत अभ्यास के लिए नियमितता, पूर्व अनुभव और गंभीर साधना की आवश्यकता को उपलब्ध स्रोत के अनुसार समझना।
सतिपट्ठान शिविर और गंभीर अभ्यास की तैयारी Read More »
राग, द्वेष और मोह को मन के अशुद्धि-कारक रूपों में समझते हुए साधना के माध्यम से उनके निरीक्षण की दिशा।
राग, द्वेष और मोह से मुक्ति की दिशा Read More »
नियमित जीवन के साथ लंबी अवधि के साधना शिविर से अभ्यास को गहराई देने की प्रेरणा।
वर्ष में एक बार दस दिवसीय शिविर का महत्व Read More »
विपश्यना में अनित्य के अनुभव का महत्व और बदलती संवेदनाओं के प्रति सजग रहने की भूमिका।
अनित्य का दर्शन: जो बदल रहा है उसे बदलता हुआ देखना Read More »