अनित्य का दर्शन: जो बदल रहा है उसे बदलता हुआ देखना
विपश्यना में अनित्य के अनुभव का महत्व और बदलती संवेदनाओं के प्रति सजग रहने की भूमिका।
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विपश्यना में अनित्य के अनुभव का महत्व और बदलती संवेदनाओं के प्रति सजग रहने की भूमिका।
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शरीर में उत्पन्न संवेदनाओं को अनित्यता के संदर्भ में देखने की साधना का सरल परिचय।
विपश्यना में शरीर की संवेदनाओं का निरीक्षण क्यों किया जाता है? Read More »