आषाढ़ पूर्णिमा और धम्मचक्कपवत्तन दिवस का संदेश
आषाढ़ पूर्णिमा से जुड़े धम्मचक्कपवत्तन के संदर्भ और धम्म के प्रसार की प्रेरणा पर आधारित लेख।
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आषाढ़ पूर्णिमा से जुड़े धम्मचक्कपवत्तन के संदर्भ और धम्म के प्रसार की प्रेरणा पर आधारित लेख।
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धम्म के संदर्भ में जन्म आधारित ऊंच-नीच की भावना से परे शील, समाधि और प्रज्ञा के महत्व को समझने वाला लेख।
जाति और ऊंच-नीच से परे धम्म का मानवीय संदेश Read More »
सैद्धांतिक जानकारी उपयोगी है, लेकिन अनुभव और अभ्यास के बिना उसका जीवन में प्रभाव सीमित रह सकता है—इस विचार पर आधारित लेख।
धम्म की चर्चा बनाम धम्म का अनुभव Read More »
गुरु से प्राप्त धम्म-विद्या के प्रति कृतज्ञता और दूसरों के कल्याण के लिए सेवा की भावना पर चिंतन।
गुरु-ऋण और धम्म सेवा: सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाना Read More »
धम्म के क्षेत्र में सफलता को व्यक्तिगत गौरव के बजाय अधिक लोगों के कल्याण और सही मार्ग तक पहुंचने से जोड़ने वाला चिंतन।
सफलता का सही अर्थ: अधिक लोगों के कल्याण की भावना Read More »
1971 में विपश्यना पत्रिका के आरंभ और साधकों तक व्यावहारिक तथा सैद्धांतिक धम्म सामग्री पहुंचाने के उद्देश्य का परिचय।
विपश्यना पत्रिका की शुरुआत: धम्म साहित्य का एक प्रयास Read More »
धम्म के कार्य में कटुता, गुटबाजी और अहंकार से बचते हुए प्रेम, सहयोग और सद्भाव का वातावरण बनाने की प्रेरणा।
धर्म की मिठास: साधना और सेवा में सद्भाव क्यों जरूरी है Read More »
गलती को सही ठहराने के बजाय उसे स्वीकारना, कारण समझना और भविष्य में सुधार करना आध्यात्मिक प्रगति का हिस्सा कैसे बन सकता है।
गलती स्वीकारने की शक्ति और आत्म-सुधार Read More »
कमियों को छिपाने या उनका औचित्य सिद्ध करने के बजाय उन्हें पहचानकर सुधार की दिशा में बढ़ने का दृष्टिकोण।
अपनी कमजोरियों को स्वीकारना क्यों जरूरी है? Read More »
कृतज्ञता शिविर की भावना, सामूहिक साधना और गुरु-परंपरा के प्रति आभार को उपलब्ध स्रोत के आधार पर समझने वाला लेख।
कृतज्ञता शिविर: गुरु परंपरा के प्रति आभार और साधना Read More »