वीर बुधु भगत झारखंड के प्रमुख आदिवासी क्रांतिकारियों में से एक थे। उन्होंने औपनिवेशिक शासन और राजस्व नीतियों के खिलाफ समुदायों को संगठित किया। 1831-32 के कोल और लरका विद्रोह के संदर्भ में उनका नाम प्रमुखता से आता है। 13 फरवरी 1832 को संघर्ष करते हुए वे शहीद हुए। झारखंड के इतिहास में उनकी स्मृति आदिवासी प्रतिरोध और आत्मसम्मान का प्रतीक है।
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