संतराम बी.ए. का नाम उत्तर भारत के सामाजिक सुधार और जाति-विरोधी लेखन की परंपरा में लिया जाता है। उन्होंने सामाजिक बराबरी, शिक्षा और आत्मसम्मान को सामाजिक परिवर्तन का आधार माना। हिंदी लेखन और सार्वजनिक विचार-विमर्श के माध्यम से उन्होंने रूढ़ियों की आलोचना की। इस व्यक्तित्व पर डिजिटल स्रोत सीमित हैं, इसलिए विस्तृत जीवन-वृत्त तैयार करते समय पुस्तकालय और अभिलेखीय स्रोतों का उपयोग करना उचित है।
संतराम बी.ए. प्रजापति से जुड़े प्रमुख कीवर्ड
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