पालि सीखें –

 सरलानि वाक्यानि

1. लड़का सड़क पर खेल रहा है।

दारको मग्गे कीळति।

2. लड़कियां तालाबों में मछलियां देखती हैं।

दारिकायो तळागे मच्छे पस्सन्ति।

3. दारको च दरिकायो पाठसाले पठन्ति.

लड़की और लड़कें पाठशाला में पढ़ते हैं.

4. किसान गावों में रहते हैं।

कसका गामे निवसन्ति।

5. हे किसानों! तुम लोग पुनः कब यहां आओगे?

हे कसका! तुम्हे पुनं कदा अत्थ आगच्छिस्सन्ति?

6. यात्रियों! तुम लोग अभी कहां जा रहे हो?

पथिका! तुम्हे इदानि कुत्थ गच्छथ?

7. मैं आसमान में पक्षियों को देख रहा हूं।

अहं आकासे सकुणानं पस्सामि।

8. यात्री दुनियां में भ्रमण करते हैं।

पथिका लोके भमन्ति।

9. हां, वे भी जा रहे हैं।

आम! ते अपि गच्छन्ति।

10. हम अब आकास में सूरज और चांद नहीं देख पा रहे हैं।

मयं इदानि आकासे सुरियं च चन्दं न पस्सतुं सक्कोम।

11. साधु सदैव पर्वत पर क्यों नहीं निवास करते हैं?

साधु सब्बदा पब्बते कथं न निवसन्ति?

12. हां! पिताजी, हम आज बाग में नहीं खेल रहे हैं।

आम पितु! मयं अज्ज उय्याने न कीळाम।

13. रोगी क्यों नहीं सय्याओं पर सोते हैं?

गिलाना कथं न सयने सयन्ति?

14. हे व्यापारियों! तुम सदैव कहां भटकते रहते हो?

हे वाणिजा! तुम्हे सब्बदा कुत्थ विचरन्ति?

15. बच्चों! तुम तालाब में कुत्तों के साथ सदैव खेलते रहते हो।

बाला! तुम्हे तळागे सुनखेहि सह सब्बदा कीळन्ति।

16. अब शिक्षक व शिष्य विहार में रहते हैं।

इदानि आचरियो च सिस्सो विहारे वसन्ति.

मैं मित्र को पत्र लिख रहा हूं।अहं मित्तं पत्तं लिखामि।हम फल खाते हैं।मयं फलानि खादाम।हम प्रतिदिन बुद्ध को फूल अर्पित करते हैं।मयं पटिदिनं बुद्धं पुप्फानि समप्पाम।वह अभी घर नहीं जा रहा है। सो इदानि घरं न गच्छति।तुम आज खेत में बीज नहीं बो रहे हो।त्वं अज्ज खेतस्मिं बीजानि न वपसि।पुत्र जल से पिता के पैर धो रहे हैं।पुत्ता जलेन पितुस्स पादे धोवन्ति।वे घर में मित्रों के साथ भोजन कर रहे हैं।ते घरे मित्तेहि सह भोजनं करोन्ति।बच्चों के मित्र बेचों पर बैठ रहे हैं।दारकानं मित्ता आसने निसीदन्ति।क्या तुम आज शिक्षकों को पत्र लिख रहे हो?किं त्वं अज्ज आचरियानं पत्तं लिखसि?मैं नौकर के द्वारा पुस्तकें घर भेज रहा हूं।अहं सेवकेन पोत्थकानि घरे पेसामि।मैं बाग में पेड़ों पर फल देखता हूं।अहं उय्याने रुक्खेसु फलानि पस्सामि।पक्षी खेत में बीज खाते हैं।सकुणा खेते बीजानि खादन्ति।मित्र आज नगर से दूर नहीं जा रहे हैं।मित्ता अज्ज नगरस्मा दूरं न गच्छन्ति।हम पैदल घर से आ रहे हैं।मयं पादेहि धरस्मा आगच्छाम।तुम अब कहां से वस्तुएं खरीदोगे?त्वं इदानि कुतो भण्डानि कीणिस्ससि?नगर के लोग रोगी को वस्त्र और दवा दे रहे हैं।नगरस्स जना गिलानं वत्थानि च ओसधानि ददन्ति।

मित्र के घर लड़की पैदा हुई।मित्तस्स घरे दारिका उपज्जि।बालिका देखने में बहुत सुन्दर है।बालिका दस्सने बहु सुन्दरा अत्थि।उसके पिता का नाम विवेक है।तस्सा पितुस्स नाम विवेको।उसके माता का नाम विसाखा है।तस्सा मातुया नाम विसाखा।बालिका स्कूल जाती है।बालिका पाठसालं गच्छति।वह प्रतिदिन स्कूल जाती है।सा पटिदिनं पाठसालं गच्छति।वह चौथी कक्षा में पढ़ती है।सा चतुत्थे वग्गे पठति।वह पढ़ने में बहुत दक्ष है।पठने सा बहु दक्खा अत्थि।वह अपने आचाार्यों का गौरव करती है।सा अत्तानं आचरियानं गारवं करोति।अपनी कक्षा में वह सबके आगे बैठती है।अत्तनि वग्गे सा सब्बस्स पूरतो तिट्ठति।वह सुबह दस बजे स्कूल जाती है।सा पातो दस वादने पाठसालं गच्छति।वह बस से स्कूल जाती है।सा लोकयानेन पाठसालं गच्छति।वह खेल/गेम्स में भाग लेती है।सा कीळायं पटिभागं गण्हाति।वह एक अच्छी धाविका है।सा एका सम्मा धाविका अत्थि।वह गायन भी अच्छा करती है।सा गायनं अपि सम्मा करोति।भीम गीत वह बहुत सुरीला गाती है।भीम-गीतं सा बहु मधुरेन सरेन गायति।स्कूल में वह अन्य विषयों के साथ पालि भासा पढ़ती है।पाठसाले सा अञ्ञेहि विसयेहि सह पालि भासा पठति।सायं चार बजे वह स्कूल से घर आती है।सायं चत्तारी वादने सा पाठसालाय घरं आगच्छति।घर आकर वह स्कूल गणवेष बदलती है।घरं आगन्त्वा सा साला-गणवेसं परिवत्तेति।

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