सुखद संवेदना से आसक्ति और दुखद संवेदना से द्वेष
सुखद अनुभव को पकड़ने और अप्रिय अनुभव को हटाने की प्रवृत्ति को समता के अभ्यास से देखने का विषय।
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सुखद अनुभव को पकड़ने और अप्रिय अनुभव को हटाने की प्रवृत्ति को समता के अभ्यास से देखने का विषय।
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नियमित दैनिक साधना मन को स्थिर, सजग और संतुलित बनाने में किस प्रकार सहायक हो सकती है।
दैनिक ध्यान का महत्व: सुबह-शाम साधना क्यों जरूरी है? Read More »
मन की पसंद-नापसंद और शरीर की संवेदनाओं के बीच संबंध को साधना के संदर्भ में समझने का प्रयास।
मन की प्रतिक्रियाएं और शरीर की संवेदनाएं Read More »
विपश्यना को केवल ध्यान की तकनीक नहीं, बल्कि शरीर और मन में घट रही वास्तविकता को समझने की साधना के रूप में कैसे देखा जाए।
विपश्यना ध्यान क्या है? अनुभव के आधार पर सत्य को देखने की कला Read More »
शरीर में उत्पन्न संवेदनाओं को अनित्यता के संदर्भ में देखने की साधना का सरल परिचय।
विपश्यना में शरीर की संवेदनाओं का निरीक्षण क्यों किया जाता है? Read More »
फुले चळवळ ही महाराष्ट्राच्या सामाजिक इतिहासातील एक महत्त्वाची परिवर्तनवादी चळवळ आहे. महात्मा ज्योतिराव फुले आणि क्रांतिज्योती सावित्रीबाई फुले यांनी शिक्षण, स्त्री-मुक्ती, जातिव्यवस्था, सामाजिक समता आणि शोषितांच्या हक्कांसाठी उभारलेला संघर्ष पुढे महाराष्ट्राच्या पुरोगामी विचारांची मजबूत पायाभरणी ठरला. पुणे हे या चळवळीचे एक महत्त्वाचे केंद्र होते. सावित्रीबाई फुले, फातिमा शेख, लहूजी साळवे आणि मुक्ताबाई साळवे यांसारख्या व्यक्तींनी
फुले चळवळ: पुण्यातून सुरू झालेल्या सामाजिक क्रांतीचा इतिहास Read More »
विपश्यना ध्यान आत्मनिरीक्षण और मन की शुद्धि की एक प्राचीन साधना है। एस. एन. गोयनका जी की परंपरा में विपश्यना के 10-दिवसीय पाठ्यक्रमों के साथ-साथ पुराने साधकों के लिए एक-दिवसीय, तीन-दिवसीय, सातिपट्ठान तथा दीर्घकालीन विशेष पाठ्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। भारत और विदेशों में आयोजित होने वाले विपश्यना पाठ्यक्रमों, एक-दिवसीय कोर्स और ग्रुप सिटिंग
विपश्यना के विभिन्न कोर्स: पात्रता, अवधि और आवेदन प्रक्रिया की पूरी जानकारी Read More »
आज की तेज़ रफ्तार जिंदगी में मन को शांत रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। काम का तनाव, पारिवारिक जिम्मेदारियाँ, आर्थिक चिंताएँ, भविष्य की चिंता, सोशल मीडिया और लगातार बढ़ती मानसिक व्यस्तता के कारण हमारा मन अक्सर विचारों से घिरा रहता है। ऐसे समय में विपश्यना ध्यान अपने मन और शरीर को समझने तथा
मन को शांत करने में विपश्यना कैसे मदद करती है? जानिए विपश्यना ध्यान का महत्व Read More »
दीप अमावस्या महाराष्ट्र की एक पारंपरिक धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा है। इस दिन दीप प्रज्वलित करने की परंपरा है। सामान्य रूप से दीपक को अंधकार दूर करने और प्रकाश का प्रतीक माना जाता है। यदि इसी विचार को बौद्ध धम्म की दृष्टि से समझें, तो प्रकाश को प्रज्ञा, विवेक, ज्ञान और सत्य की समझ का प्रतीक माना
दीप अमावस्या और बौद्ध धर्म: प्रकाश, प्रज्ञा और अज्ञान का अंधकार Read More »
वर्षावास बौद्ध धर्म की एक प्राचीन और महत्वपूर्ण परंपरा है। इसका अर्थ है वर्षा ऋतु के दौरान भिक्षुओं का एक निश्चित स्थान पर रहकर ध्यान, साधना, धम्म का अध्ययन और आत्मचिंतन करना। भगवान बुद्ध के समय से ही वर्षावास की परंपरा बौद्ध संघ के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। वर्षा ऋतु में लगातार यात्रा
वर्षावास क्या है? बौद्ध धर्म में वर्षावास का महत्व Read More »