Bhim Army का इतिहास

परिचय
भीम आर्मी (Bhim Army) भारत का एक सामाजिक संगठन है, जो मुख्य रूप से दलितों, पिछड़े वर्गों और कमजोर वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए काम करता है। इसका पूरा नाम “भीम आर्मी भारत एकता मिशन” है। यह संगठन सामाजिक न्याय, शिक्षा और समानता के लिए जाना जाता है।


स्थापना और शुरुआत

भीम आर्मी की स्थापना 2015 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुई थी। इसके संस्थापक हैं:

  • Chandrashekhar Azad Ravan
  • Vinay Ratan Singh

इस संगठन का नाम B. R. Ambedkar के सम्मान में रखा गया है, जिन्हें “भीमराव” या “बाबा साहेब” कहा जाता है।


मुख्य उद्देश्य

भीम आर्मी के प्रमुख उद्देश्य हैं:

  1. शिक्षा का प्रसार – गरीब और दलित बच्चों के लिए फ्री स्कूल खोलना
  2. सामाजिक न्याय – जातिवाद और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाना
  3. समान अधिकार – सभी वर्गों को बराबरी का अधिकार दिलाना
  4. कानूनी सहायता – अन्याय के खिलाफ कानूनी मदद देना

प्रमुख गतिविधियाँ

  • सहारनपुर और अन्य क्षेत्रों में फ्री स्कूल (भीम पाठशालाएं) शुरू करना
  • दलितों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ प्रदर्शन और आंदोलन
  • सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूकता फैलाना
  • शिक्षा और संविधान के प्रति लोगों को जागरूक करना

सहारनपुर हिंसा (2017)

2017 में सहारनपुर में जातीय हिंसा हुई, जिसमें भीम आर्मी का नाम प्रमुखता से सामने आया। इस घटना के बाद:

  • Chandrashekhar Azad Ravan को गिरफ्तार किया गया
  • भीम आर्मी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई
  • दलित अधिकारों के लिए यह संगठन और मजबूत बना

भीम आर्मी का प्रभाव

आज भीम आर्मी केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे भारत में इसका प्रभाव बढ़ रहा है। यह संगठन युवाओं को जागरूक कर रहा है और उन्हें शिक्षा व अधिकारों के लिए प्रेरित कर रहा है।


भीम आर्मी ने कम समय में सामाजिक न्याय और समानता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहचान बनाई है। Chandrashekhar Azad Ravan के नेतृत्व में यह संगठन दलितों और कमजोर वर्गों की आवाज बनकर उभरा है।

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