धर्म के सजीव उदाहरण बनें: केवल बोलें नहीं, जीएं
धम्म को अपने आचरण, साधना और व्यवहार में उतारने की प्रेरणा पर आधारित स्रोत-आधारित लेख।
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धम्म को अपने आचरण, साधना और व्यवहार में उतारने की प्रेरणा पर आधारित स्रोत-आधारित लेख।
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धर्म की चर्चा और वास्तविक जीवन में उसे धारण करने के बीच के अंतर को साधना के संदर्भ में समझना।
धर्म को धारण करना केवल चर्चा से आगे की बात है Read More »
2001 की 14-दिवसीय धर्मयात्रा के संदर्भ में बुद्ध से जुड़े तीर्थस्थलों, सामूहिक साधना और धम्मवाणी की झलक।
धर्मयात्रा 2001: बुद्ध के तीर्थस्थलों की साधना यात्रा Read More »
सामूहिक कार्य में अपनी राय रखने के बाद निर्णय से चिपके रहने के बजाय व्यापक हित को स्वीकारने की सीख।
सुझाव देना और परिणाम स्वीकारना: आसक्ति से कैसे बचें? Read More »
1971 में विपश्यना पत्रिका के आरंभ और साधकों तक व्यावहारिक तथा सैद्धांतिक धम्म सामग्री पहुंचाने के उद्देश्य का परिचय।
विपश्यना पत्रिका की शुरुआत: धम्म साहित्य का एक प्रयास Read More »
धम्म के क्षेत्र में सफलता को व्यक्तिगत गौरव के बजाय अधिक लोगों के कल्याण और सही मार्ग तक पहुंचने से जोड़ने वाला चिंतन।
सफलता का सही अर्थ: अधिक लोगों के कल्याण की भावना Read More »
सयाजी ऊ बा खिन से जुड़ी परंपरा और भारत में विपश्यना के प्रसार की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर स्रोत-आधारित लेख।
सयाजी ऊ बा खिन और विपश्यना की परंपरा Read More »
धम्म सेवा को पद या प्रतिष्ठा के बजाय कल्याण और योगदान की भावना से समझने का प्रयास।
धम्म सेवा क्या सिखाती है? देने की भावना का महत्व Read More »
विभिन्न केंद्रों में आयोजित शिविरों की जानकारी से भारत में साधना के लिए उपलब्ध केंद्रों की व्यापकता को समझने वाला लेख।
भारत में विपश्यना केंद्रों का विस्तार और साधकों की सुविधा Read More »
धम्म के कार्य में कटुता, गुटबाजी और अहंकार से बचते हुए प्रेम, सहयोग और सद्भाव का वातावरण बनाने की प्रेरणा।
धर्म की मिठास: साधना और सेवा में सद्भाव क्यों जरूरी है Read More »